बजट: आइये जानते हैं देश का “बजट” इतिहास, ब्रिटिश इंडिया से अब तक कितने उतार-चढ़ाव से गुजरा देश

ब्रिटिश इंडिया में आया देश का पहला बजट

नई दिल्ली- एक वक्त था जब हमारा देश भारत विभिन्न रियासतों में बँटा हुआ था और विकास का खाका राजे-रजवाड़े अपने मनमाफिक लागू करते थे तब न कोई बजट जैसा शब्द देश जानता था और न ही इसकी उपयोगिता। ये स्थिति देश की ब्रिटिश पराधीनता तक भी लगातार जारी थी, लिहाजा देश विकास से कोसों दूर था। ऐसे में ब्रिटिश अधीन भारत के विकास के लिये, विकास योजनाओं को देश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुँचाने के लिये स्कॉटिश अर्थशास्त्री और ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े नेता जेम्स विल्सन ने ब्रिटेन में महारानी के सामने भारत का बजट पेश किया था। आज से करीब 162 साल पहले, पहली बार देश का बजट साल 1860 की 7 अप्रैल को पेश किया गया था, और तब से देश के विकास से पूर्व प्रतिवर्ष बजट घोषित करने की प्रकिया अनवरत जारी है।

आजाद भारत का पहला बजट मात्र 171 करोड़  का

15 अगस्त 1947 में भारत की आजादी के साथ ही देश को विकास की राह पर ले जाने का बीड़ा भारत की हमारी सरकार ने उठाते हुये 26 नवंबर साल 1947 को पेश किया गया था। इस बजट को तत्कालीन वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने संसद में पेश किया था इसके बाद संशोधित बजट मार्च 1948 में प्रस्तुत किया गया था। उस समय कुल राजस्व 171 करोड़ रुपये था।  आज तक देश में सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम पर दर्ज है वह साल 1962 से लेकर 1969 तक देश के वित्त मंत्री रहे थे। इस बीच उन्होंने 10 बार से ज्यादा देश का आम बजट पेश किया था। वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 9 बार, पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 8 बार बजट देश के सामने पेश किया था।

इंदिरा गांधी के बनाया रिकार्ड

देश की प्रथम प्रधानमंत्री का रिकार्ड अपने नाम बनाने वाली इंदिरा गांधी के नाम पर ही एक और रिकार्ड दर्ज है, वो रिकार्ड है देश का पहल बजट पेश करने का जी हाँ इंदिरा जी ही वो पहली महिला थी जिन्होेने पहली बार साल 1970 में वित्त मंत्री के रूप में देश का पहला बजट पेश किया। लेकिन रिकार्ड की बात करें सबसे ज्यादा बार एक महिला के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सर्वाधिक चार बार बजट पेश किया है।

टूटी रेलबजट व बजट की अलग-अलग परंपरा

आजादी के बाद से लेकर अब तक देश में रेल बजट व आम बजट को अलग-अलग लाने की परंपरा थी लेकिन साल 2014 में बनी मोदी सरकार ने इस पर काम करते साल 2017 में ये परंपरा तोड़ दी, इसके साथ ही देश के आम बजट में ही रेल बजट को भी समावेशित किया गया। रेल बजट को आम बजट में विलय का सरकार का एकमात्र एंजेडा ये था कि अलग-अलग बजट लाने से सरकार के कामकाज में लगने वाला समय व अपव्यय घटेगा, लिहाजा सरकार अलग-अलग बजट की परंपरा पर विराम लगा दिया। इसके साथ ही इसी साल से 2017 में अरुण जेटली ने फरवरी महीने की आखिरी कार्य दिवस का इस्तेमाल करने की परंपरा को तोड़कर 1 फरवरी से केन्द्रीय बजट पेश करना शुरू किया.

171 करोड़ से बढ़कर 34 लाख करोड़ तक पहुँचा बजट

एक वक्त था जब आजादी के बाद देश का बजट मात्र 171 करोड़ का था लेकिन आज देश विकास के शिखर की ओर बढ़ है और बदलते भारत में  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट प्रस्ताव पेश करेंगी। यह लगातार चौथा मौका होगा जब सीतारमण बजट पेश करेंगी। सरकार ने 2021-22 के बजट में 34.8 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है।